मानवी /short story

मेरे पडोसी की बेटी मानवी ,मानवी का घर बिल्कुल मेरे घर के बगल वाला घर है । मानवी अपने चार भाई-बहन में सबसे बड़ी है एक मीडिलक्लास परिवार मैं पैदा हुई मानवी एक आम सी शक्लोसूरत वाली एकहरे बदन वाली घरेलू लड़की थी जिसके जीवन में उसके माता-पिता का ही फैसला हमेशा मान्य होता था । एक दिन मानवी की माँ ने बताया की मानवी की शादी तय हो गई है तब मानवी की महज उम्र अठारह साल ही थी ।

तीन महीने बाद मानवी की शादी का दिन आ गया बारात भी दरवाजे पर आ गई सब दुल्हे को देखने के लिए जिज्ञासु थे थोड़ी देर बाद जयमाला के लिए दुल्हा आया और मानवी भी आई लोग दोनों को देख कानाफूसी करने लगे क्योंकि दुल्हे की उम्र मानवी से बहुत ज़्यादा थी तकरीबन पन्द्रह साल और मानवी की शादी उससे कर दी गई । मानवी ससुराल चली गई उसके बाद वह चार महिने बाद आई कुछ खुश नहीं लग रही थी अपनी शादी को लेकर अपने पति को लेकर कुछ एक -ड़ेढ़ महिने रह कर वापस ससुराल चली गई फिर लगभग सात महिने बाद आई और.करीब तीन महिने तक रुक गई तब सब दबी जबान में बात करने लगे की मानवी का पति उसे मारता पिटता है कुछ और समय बीता तो सब कहने लगे वह हर तरह का नशा करता है। चरस, गांजा जैसा पहले सबकी इन बातों पर मानवी के माता-पिता ने एतराज जताया की लोघ झूठ बोल रहे हैं पर बीतते समय के साथ यह बात खुलकर सबके सामने आ गई की मानवी अपनी शादी में हिंसा का शिकार भी होती है उसके लिए एक नशेड़ी जुआरी मारपीट करते वाले पति के साथ जीना मुश्किल हो गया था।

इस तरह से लगभग डेढ़ साल से ज़्यादा बीत गए उसके ससुराल से उसकी सास -ससुर उसे लेने आये तब मानवी ने जाने से इनकार कर दिया पर मानवी के माता-पिता ने उसे उसकी मर्जी के खिलाफ एक बार फिर वहाँ भेज दिया कुछ बीस दिन बाद मानवी अपने भाई के साथ वापस आ गई फिर वही बातें सब करने लगे मानवी इस बीच ससुराल न जाने की बात कह दी थी और व अपनी पढ़ाई भी दोबारा शुरू करना चाहती थी उसने ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने का फैसला किया और ग्रेजुएशन के 1st year में एडमिशन ले लिया इस बीच लोग बातें बनाते रहे मानवी के माता-कभी झूठ तो कभी सच बोल इन सारी बातों से बचते रहे इस बीच मानवी के ससुराल से कई बार मानवी के वापस चलने.की बात कही पर मानवी ने हर बार मना कर दिया खुद को हिंसा से बचाने के लिए उसने यह फैसला लिया था और वह उस फैसले पर अडिग भी रही इस पर उसके ससुराल वालों ने खूब हंगामा किया फिर भी मानवी नहीं गई ।

इस तरह मानवी के जीवन का मुश्किल भरा समय बीतता रहा और वह ग्रेजुएशन के 2nd year में आ गई जहाँ उनकी कॉलेज लाइफ भी ठीक ठाक चल रही थी कुछ हलकेपन के साथ मानवी जीने लगी थी तभी एक दिन कॉलेज में उसके ग्रुप में उसकी मुलाकात एक रतन नाम के लड़के से हुई, रतन ग्रेजुएशन first year का स्टुडेंट था वो भी एक मिडिलक्लास परिवार से ही था । मानवी और रतन अक्सर ग्रुप में मिला करते थे इस बीच उनकी एक दूसरे से दोस्ती हो गई उधर मानवी के ससुराल वालों का दबाव मानवी पर बढ़ने लगा था वह तनाव में रहने लगी थी बार बार सब इस हिंसा भरी शादी को निभाने के लिए मानवी पर दबाव बना रहे थे खुद मानवी के माता-पिता भी ससुराल जाने के लिए मानवी पर मानसिक दबाव डाल रहे थे पर मानवी ने जाने से इनकार कर दिया और उसने तलाक लेने का फैसला किया जिसके बाद उसके घर में भूचाल सा आ गया सब उसके खिलाफ हो गए पर मानवी डटी रही इस तरह कुछ और महिने बीत गए इस बीच रतन और मानवी की दोस्ती आपनेपन में बदल चुकी थी एक दिन मोहल्ले में ये बात होने लगी की मानवी का अफ़ेयर चल रहा है इस तर की बातें होते कुछ और वक्त बीत गया ।

कुछ समय बाद मानवी के ससुराल से उसका पति व ससुराल के लोग आये व मानवी के माता-पिता से मानवी को विदा कर ले जाने की बात करने लगे तब मानवी ने फिर मना कर दिया फिर खूब हंगामा हुआ पुलिस बुलाकर किसी तरह सब शांत हुआ । सबके जाने के बाद मानवी के घर वालों ने मानवी पर हार तक उठा दिया पर मानवी फिर भी एक ही बात कहती रही वह किसी मजदूर के साथ जीवन जी सकती है पर एक नशेड़ी के साथ नहीं इन सब बातों के बीच मानवी ने अपने और रतन के रिश्ते के बारे में भी बता दिया ।इस पर सब उससे बहुत नराज़ हुए उसका घर से निकलना बन्द कर दिया उस पर पहरा सा लगा दिया गया करीब इस तरह दश दिन बीत गए इन दश दिनों में मानवी ने जो देखा जो सहा उसे यह समझ आ चुका था की अब उसका साथ कोई नहीं देगा न उसकी माँ न कोई और सब उसे उसके ससुराल भेजकर रहेंगे जहाँ उसे नरक सा जीवन जीना पडेगा । अब अपनी बेहयर जीवन के लिए उसे ही फैसला लेना होगा मानवी ने घर से भागने का फैसला लिया और एक दिन अपनी चाची की मदद से वो घर से बाहर निकलने में कामयाब हो गई अगले दिन यह बात आग की तरह मोहल्ले में फैल गई की मानवी भाग गई किसी लड़के के साथ लोग जिसका ज़िक्र कर रहे थे वो लड़का रतन था।

मानवी के घर वालों ने पता लगा लिया की रतन कौन है और कहाँ रहता है रतन का घर हमारे मोहल्ले से पाँच मिनट की दूरी पर दूसरे मोहल्ले में रहता था । मानवी के घर वाले रतन के घर पहुंच कर उसके घर वालों को बहुत डराया, धमकाया मार पीट भी की पर मानवी-रतन का कोई पता नहीं चला मानवी के घर वालों ने रतन के घर वालों पर कई झूठे आरोप लाग FIR तक कर दिया पर मानवी का कुछ पता नहीं चला । फिर कुछ दो साल बाद रतन के एक पड़ोसी से मानवी के घर वालों को पता चला की मानवी मुम्बई में रतन के साथ शादी कर रह रही है व उनकी एक बेटी भी है वहाँ छोटी-मोटी नौकरी कर अपना जीवन जी रहे हैं ।

मानवी मुम्बई में कोई सपनों सा सुन्दर ऐशोआराम भरा जीवन नहीं जी रही थी पर उसने जो ज़िंदगी चुनी थी अपनी पसंद की वो जी रही थी अपनी पहली हिंसा भरी शादी से आजाद होकर जिसके लिए उसने बहुत लड़ाई लड़ी थी ।

.

.

.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Create your website with WordPress.com
Get started
%d bloggers like this: